Election Commission – निर्वाचन/चुनाव आयोग

सामान्य परिचय:-

  • निर्वाचन आयोग का प्रावधान भारतीय संविधान के भाग 15 में अनुच्छेद 324 से अनु0 329 तक है।
  • भारत में प्रतिनिधि लोकतंत्र है जिसमें जनता द्वारा निर्वाचित जन प्रतिनिधि शासन में भाग लेते हैं। अतः जन प्रतिनिधियों का चुनाव निष्पक्ष ढंग से हो सके इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 324 में स्वतंत्र और निष्पक्ष एवं संवैधानिक निर्वाचन आयोग का प्रावधान किया गया है।
  • अनुच्छेद 325 के अनुसार:-किसी व्यक्ति को धर्म, मूल वंश, जाति, लिंग आदि के आधार पर निर्वाचक नामावली में सम्मिलित होने से वंचित नहीं किया जाएगा।
  • अनुच्छेद 326 के अनुसार:-लोकसभा और विधानसभाओं का चुनाव वयस्क मताधिकार के आधार पर होगा। (सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार) मूल संविधान में वयस्कता की आयु 21 वर्ष थी। राजीव गाँधी सरकार ने 61वाँ संविधान संशोधन अधिनियम 1989 द्वारा 18 वर्ष किया गया। पी0 नल्लापंथी केस (1984) में न्यायालय ने कहा-मताधिकार मूलाधिकार नहीं है। यह सांविधिक अधिकार है।
  • अनुच्छेद 327 के अनुसार:-संसद प्रत्येक सदन के लिए और राज्य विधान मण्डलों के लिए निर्वाचन संबंधी विधि बना सकती है।
  • अनुच्छेद 328:-राज्य विधान मंडल राज्यों से सम्बन्धित निर्वाचन संबंधी विधि बनाएगी। परन्तु वह विधि संसदीय विधि के प्रतिकूल न हो।
  • अनु0 329 के अनुसार:निर्वाचन मामलों में न्यायपालिका का हस्तक्षेप नहीं होगा। (प्रक्रिया)

निर्वाचन आयोग का गठन एवं कार्य:-

  • अनु0 324 के अनुसार:-भारत का एक निर्वाचन आयोग होगा जो मुख्य निर्वाचन आयुक्त तथा अन्य आयुक्तों से मिलकर बनेगा। 25 जनवरी 1950 को निर्वाचन आयोग की स्थापना की गयी इसीलिए 25 जनवरी को राष्ट्रीय मतदान दिवस मनाया जाता है। 1989 तक निर्वाचन आयोग एक सदस्यीय था। 1989 में यह तीन सदस्यीय हुआ। वर्तमान में यह तीन सदस्य है। जिनका एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त है तथा दो अन्य निर्वाचन आयुक्त हैं। इनकी नियुक्ति भारत सरकार के परामर्श पर राष्ट्रपति जी द्वारा होती है। 2015 से-20वाँ मु0 निर्वाचन आयुक्त डा0 नशीम जैदी है। और अन्य सदस्य है-अचल कुमार ज्योति, ओम प्रकाश रावत।

कार्यकाल:-मुख्य निर्वाचन आयुक्त का कार्यकाल पद ग्रहण की तिथि से 6 वर्ष या 65 वर्ष होगा (जो पहले आये)। अन्य आयुक्तों का कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष होगा। (जो पहले आये)
कार्यकाल के पूर्व ये अपना त्यागपत्र राष्ट्रपति जी को दे सकते हैं। मुख्य निर्वाचन आयुक्त को कार्यकाल से पूर्व संसद की सहमति से राष्ट्रपति जी हटाएगें। अन्य आयुक्तों को कार्यकाल से पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त के परामर्श पर राष्ट्रपति जी हटा सकते हैं।
वेतन:-आयुक्तों का वेतन और भत्ता भारत की संचित निधि पर भारित होता है। इसका निर्धारण समय-समय पर संसद करती है। कार्यकाल के दौरान इनके वेतन भत्तों में कटौती नहीं की जा सकती है।
राष्ट्रीय वित्तीय आपातकाल के दौरान इनके वेतन भत्तों में कटौती की जा सकती है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त का वेतन 90,000 तथा अन्य आयुक्तों का वेतन 80,000 प्रतिमाह है।
शपथ:-आयोग के अध्यक्ष सदस्यों के शपथ का प्रावधान नही है।

निर्वाचन आयोग का कार्य –

(1) संसद राज्य विधानमण्डलों राष्ट्रपति तथा उपराष्ट्रपति के निर्वाचन हेतु निर्वाचक नामावली तैयार करना तथा चुनाव का अधीक्षण निर्देशन और नियंत्रण करना (अनुच्छेद 324(1) )
(2) प्रत्येक जनगणना के बाद निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन करना। प्रथम परिसीमन आयोग का गठन 1952 में हुआ।
(3) राजनीतिक दल के लिए चुनाव आचार संहिता जारी करना। (Code of Conduct)  इसके अन्तर्गत निम्नलिखित तथ्य आते हैं-

  • आचार संहिता लागू (चुनाव घोषणा के बाद) होने के बाद सरकार किसी नयी योजनाओं को लागू नहीं करेगी और न ही कर्मचारियों की नियुक्ति और पदच्युति स्थानान्तरण करेगी।
  • भाषा, धर्म, जाति आदि के आधार पर कोई भड़काऊ भाषण नहीं दिया जाएगा।
  • मतदान केन्द्र से 100 मीटर के अन्दर प्रचार कार्य नहीं।
  • धार्मिक संस्थाओं का प्रयोग चुनाव प्रचार के रूप में नहीं किया जाएगा। राजनीतिक दलों और नेताओं द्वारा मतदान व्यवहार को अपने पक्ष में करने के लिए किसी व्यवहार को अपने पक्ष में करने के लिए किसी वस्तु का वितरण (रुपया, दारू, वस्त्र आदि) नही किया जाएगा।
  • राजनीतिक दलों द्वारा बैनर पोस्टर आदि का प्रयोग मकान मालिक के अनुमति के बगैर उसके भवन पर नहीं किया जाएगा। दूरदर्शन, आकाशवाणी आदि पर राजनीतिक दलों को एक मानक में चुनाव प्रचार का अवसर दिया जाएगा।
  • मतदाताओं तथा चुनाव कर्मियों को चुनाव हेतु प्रशिक्षित किया जाएगा।
  • आचार संहिता के उल्लंघन पर लोक प्रतिनिधित्व कानून 1951 एवं IPC आदि के तहत मुकदमा दर्ज किया जायेगा।

(4)    उपचुनाव का संचालन करना।
(5)    राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों को मान्यता देना और चुनाव चिह्न आबंटित करना।
(6)    चुनाव तिथियों की घोषणा करना। एवं चुनाव की व्यवस्था करना।
(7)    चुनाव समापन की घोषणा करना।
तथ्य:-

  • एक्जिट पोल:-मीडिया द्वारा चुनाव के तुरन्त बाद मतदाताओं का तुरन्त रूझान जानकर छदम् चुनाव परिणाम बताना एक्जिट पोल कहलाता है।
  • मतदान की थकान:-बार-बार चुनाव से ऊबकर जब भाग न ले जिससे मतदान का प्रतिशत कम होने लगे तो इसे निर्वाचन की थकान कहेंगे।
  • लोप प्रतिनिधित्व संशोधन अवि0-1988 द्वारा म्टड को मान्यता दी गयी।
  • भारत में  म्टड की शुरूआत 1989 में हुयी।
  • चुनाव चिन्ह (आवंटन, आरक्षण) आदेश 1968 में संशोधन करते हुए व्यवस्था दी कि पार्टी को राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय मान्यता खत्म होने पर अगले छः वर्ष एक चुनाव चिन्ह् का प्रयोग परन्तु अन्य पूर्ववर्त करते रहेगें। सुविधाएं नहीं मिलेगी आकाशवाणी पर समय आदि।
  •  प्रथम निर्वाचन आयुक्त-सुकुमार सेन थे।
  • आम चुनाव की अधिसूचना राष्ट्रपति द्वारा जारी की जाती है तदोपरांत आयोग द्वारा मतदान तिथियों की घोषणा की जाती है। (यही से चुनाव प्रक्रिया आरम्भ होती है।
  • पर्चा भरने का समय सामान्यतः 8 दिन का होता है जबकि उसकी जांच एवं वापसी का समय 2 दिन का होता है।
  • चुनाव प्रचार हेतु 14 दिन का समय दिया जाता है तथा चुनाव के दिन से 48 घण्टे पूर्व प्रचार बन्द करा दिया जाता है।
  • चुनाव खर्च-लोकसभा हेतु-40 लाख, विधानसभा हेतु-16 लाख है।
  • जमानत जब्त होना:-पड़े वैध मतों का 1/6 से कम मत पाने वाले उम्मीदवार की जमानत जब्त हो जाती है। अर्थात जमानत राशि वापस नहीं होती।
  • लोकसभा हेतु 25000 और विधानसभा हेतु 10,000 जमानत राशि निश्चित है।

चुनाव संबंधी समितियाँ:-

  1. तार कुंडे समिति (1974) आयोग बहु सदस्यीय हो।
  2. दिनेश गोस्वामी समिति (1990) आयोग बहुसदनीय है।
  3. वोहरा समिति (1993) राजनीति के अपराधीकरण पर)
  4. इन्द्रजीत समिति (गठन 1998 रिपोर्ट 2000) चुनाव खर्चो पर रिपोर्ट दी थी।

वर्तमान में निर्वाचन आयोग द्वारा मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय दल इस प्रकार हैं-
1.    भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी
2.   
भारतीय जनता पार्टी
3.   
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी
4.   
माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी
5.   
बहुजन समाज पार्टी

  • ओपीनियम पोल चुनाव के पूर्व वास्तविक मतदान के पहले झुकाव को जानने का एक माध्यम है। यह ’एक्जिट पोल’ के मुकाबले विश्वसनीय नही है।
  • मतदाताओं को पहचान पत्र देने का प्रावधान-निर्वाचन विधि (संशो0) अधि0 1975 द्वारा।
  • ओपीनियम पोल:-इसके अन्र्तगत सर्वेक्षण कर्ता मतदाताओं से उनकी पसन्द के राजनीतिक दल एवं उसके प्रत्याशियों के नाम इत्यादि की जानकारी लेकर चुनाव परिणामों की भविष्यवाणी करते हैं।
  • सैफोलाजी:-मतदान पूर्व मतदाताओं के रुझानों के सर्वेक्षण के आधार पर किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल के विजयी होने की पूर्व भविष्यवाणी ही ’सेफोलाजी’ है।
  • सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार का आधार ।Art: 323 है 26 नवम्बर 949 को लागू हुआ।
  • चुनाव आचार संहिता सर्वप्रथम 1971 के 5वें आम चुनाव में जारी किया।
  • भारत में सामान्य एक मतदान केन्द्र पर 1000 मतदाता वोट डालते हैं।

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Sandeep Kumar

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