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Constitutional development of India – भारत का संवैधानिक विकास

भारत का संवैधानिक विकास !

नमस्कार दोस्तों | naukriname के इस आर्टिकल में आपका स्वागत है | हम इस आर्टिकल में “भारत के संवैधानिक विकास “को साधारण शब्दो में समझने का प्रयास करेंगे | यह आर्टिकल मुख्य रूप से आगामी  सिविल परीक्षाओ  जैसे आईएएस /आईपीएस / पीसीएस को ध्यान में रखकर हमारी टीम द्वारा तैयार किया गया है | तो आइये इस आर्टिकल की शुरुआत करते है |

सन 1600 ई0 में ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ ने एक चार्टर के माध्यम से ईस्ट इंडिया कम्पनी को 15 वर्षो के लिए ब्यापार करने का अधिकार पत्र दिया | प्रारंभिक समय में यह कम्पनी एक ब्यापारिक कम्पनी के रूप में अपना कार्य शुरू किया| धीरे-धीरे यह कम्पनी भारत के प्रशासनिक क्षेत्र में अपना कार्य शुरू किया | जब वह प्लासी एवं बक्सर का युद्ध जीत जाते है तो वह  केवल ब्यपारिक कम्पनी नहीं रह जाते है बल्कि एक प्रशासक बन जाते है और भारत के प्रशासन व्यवस्था को संचालित करने लगते है  |

कम्पनी के अधिकारी बड़ी संख्या में धन लूटकर ब्रिटेन ले जाते थे | इसके कारण ब्रिटेन में अराजकता की स्थिति उत्पन्न होने लगती है | वे अधिकारी जो भारत से धन लूटकर ब्रिटेन ले जाते थे उन्हें ब्रिटेन में भी हेय की दृष्टि से देखा जाने लगा | इससे ब्रिटेन में अब्यवस्था फैलने लगती है | इस अब्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए ब्रिटिश क्राउन (संसद ) द्वारा कुछ कानून बनाये जाते है ताकि कम्पनी के अधिकारों  पर नियन्तरण रखा जा सके | ताकी कम्पनी बेहतर ढंग से कार्य कर सके और कम्पनी का काम ब्रिटेन के विकास में सहयोग करे | इसलिए कम्पनी को कानून मनवाने के लिए विवश किया गया | आइये हम उन नियम /एक्ट को जानने का प्रयास करे जिनके माध्यम से कम्पनी के कार्यो को नियंत्रित किया गया |

*  1773 ई0 का रेगुलेटिंग एक्ट : –

  • कम्पनी पर संसदीय नियंत्रण का स्थापना किया गया |
  • बंगाल के गवर्नर को ” बंगाल का गवर्नर जनरल “ पद नाम दिया गया |
  • गवर्नर जनरल की सहायता के लिए चार सदस्यीय ‘कोर्ट ऑफ़ प्रोपराइटर्स ‘ ( कार्यकारी परिषद ) का गठन किया गया |
  • बंगाल का प्रथम गवर्नर जनरल- वारेन हेस्टिंग्स |
  • सन 1774 ई0 में कोलकाता में सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना की गई | इसके प्रथम मुख्य न्यायधीश सर एलिजा इम्पे बनाये गए |
  • कम्पनी के कर्मचारियों पर निजी ब्यापार करने तथा उपहार लेने पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया |
  • ब्रिटिश सरकार ने कोर्ट ऑफ़ डायरेक्टर्स ‘ के माध्यम से कम्पनी पर नियंत्रण स्थापित किया |
  • प्रारम्भ में कोर्ट ऑफ़ डायरेक्टर्स में कुल 24 सदस्यों को नियुक्त किया गया |

*  1784 ई0 का पिटस इंडिया एक्ट : –

  • कार्यकारी परिषद्  ‘कोर्ट ऑफ़ प्रोपराइटर्स ‘ में सदस्यों की संख्या को घटाकर  तीन कर दिया गया |
  • कम्पनी के राजनितिक एवं ब्यापारिक कार्यो को बाँट दिया गया |
  • ब्यापारिक मामलो के प्रबंधन के लिए निदेशक मंडल को अनुमति दी गई |
  • राजनितिक मामलो के प्रबंधन के लिए ‘बोर्ड ऑफ़ कण्ट्रोल’ का गठन किया गया |

*  1786 ई0 का संसोधन अधिनियम : –

  • यह संसोधन अधिनियम  कार्नवालिस के सम्बन्ध में लाया गया |
  • गवर्नर जनरल को मुख्य सेनापति घोषित किया गया |
  • गवर्नर जनरल  को अपने परिषद् के निर्णय को निरस्त करने  तथा लागू करने का अधिकार प्रदान किया गया |

*  1793 ई0 का चार्टर एक्ट : –

  • कंपनी का शासन अधिकार 20 वर्षो के लिए बढ़ा दिया गया |
  • बंगाल के गवर्नर जनरल को बम्बई और मद्रास के पर्यवेक्षण  का अधिकार दे दिया गया |

*  1813 ई0 का चार्टर एक्ट : –

  • कंपनी का शासन पुनः 20 वर्षों के लिए बढ़ाया गया |
  • कम्पनी के भारतीय ब्यापार के एकाधिकार को समाप्त कर दिया गया | यद्द्पि चीन तथा चाय के ब्यापार  पर कम्पनी का अधिकार बना रहा |
  • कम्पनी द्वारा शिक्षा पर एक लाख रूपये खर्च करने का उपबंध किया गया |
  • ईसाई मिशनरियों को भारत  में आकर धर्म प्रचार करने की अनुमति दे दी गई |

*  1833 ई0 का चार्टर एक्ट :-

  • कंपनी का शासन पुनः 20 वर्षों के लिए बढ़ाया गया |
  • कम्पनी के ब्यापारिक एकाधिकार को पूर्णतः समाप्त कर दिया गया | अब उसे भविष्य में केवल राजनितिक कार्य ही करने थे|
  • जाती और वर्ग के आधार पर सरकारी नौकरी में भेद-भाव समाप्त कर दिया गया |
  • बंगाल के गवर्नर जनरल को सम्पूर्ण भारत का गवर्नर जनरल बना दिया गया|
  • भारत के प्रथम गवर्नर जनरल- लार्ड विलियम बेंटिंग |
  • गवर्नर जनरल की परिषद् में एक विधि सदस्य ( चौथा सदस्य ) को सम्मिलित किया गया | प्रथम विधि सदस्य – लार्ड मैकाले |
  • 1833 ई0 के चार्टर एक्ट के तहत 1843 ई0 में एलेनबरो द्वारा दास – प्रथा को समाप्त कर दिया गया |

*  1853 ई0 का चार्टर एक्ट : –

  • कोर्ट ऑफ़ डायरेक्टर्स के सदस्य संख्या को 24 से घटाकर 18 कर दिया गया |
  • भारत के अधिकारियो की नियुक्ति के लिए प्रतियोगिता परीक्षा की ब्यवस्था की गई |
  • गवर्नर जनरल की परिषद् में विधि सदस्य को अन्य सदस्यों की तरह सभी अधिकार दिये  गये  |
  • विधि निर्माण हेतु केंद्रीय विधान परिषद् की स्थापना की गई |
  • विधायी शक्तियों को कार्यपालिका शक्तियों से अलग करने की ब्यवस्था की गई |

 

नोट :- 1857  की क्रांति के उपरान्त भारत में कंपनी के शासन को समाप्त कर दिया गया तथा सम्पूर्ण भारत का शासन ब्रिटिश क्राउन / संसद के हाथो में चला गया | अब ब्रिटिश क्राउन द्वारा भारत की शासन ब्यवस्था के लिए अधिनियम बनाये जाने लगे|

*  1858 ई0 का भारत शासन अधिनियम : –

  • कम्पनी का शासन समाप्त हो गया तथा ब्रिटिश क्राउन का सीधा शासन शुरू हो गया |
  • भारत सचिव का एक पद बनाया गया यह भारत सचिव ब्रिटिश मंत्रिमंडल के एक सदस्य होते थे |
  • इनकी सहायता के लिए 15 सदस्यीय “भारतीय परिषद् ” का गठन किया गया |
  • इनके कार्यालय का खर्च भारत से होम चार्जेज के रूप में लिया जाने लगा |
  • भारत के गवर्नर जनरल के पदनाम को समाप्त कर दिया गया तथा उसका नाम वायसराय रखा गया|
  • भारत के प्रथम वायसराय लार्ड कैनिंग थे |

*  1861 ई0 का भारत परिषद् अधिनियम : –

  • वायसराय को अपने कार्यकारी परिषद् में पुनः एक और विधि सदस्य की नियुक्ति की गई | ( अब कुल 5 सदस्य )
  • भारत में विधानसभा की ब्यवस्था इस अधिनियम के द्वारा की गई थी  |
  • वायसराय को अपने कार्यकारी परिषद् में कम से कम 6 तथा अधिक से अधिक 12 सदस्यों की नियुक्ति का अधिकार दिया गया |
  • वायसराय को कुछ विकट स्थितियों में अध्यादेश लाने का अधिकार दिया गया  |

*  1892  ई0 का भारत परिषद् अधिनियम : –

  • वायसराय को अपनी कार्यकारी परिषद् में से कम से कम 10 तथा अधिक से अधिक 16 सदस्यों की नियुक्ति का अधिकार दिया गया |
  • भारतीय पद्धति में निर्वाचन ब्यावस्था की शुरुआत किया गया |
  • केंद्रीय विधान परिषद् में भारतीय सदस्यों को वार्षिक बजट पर बहस करने तथा प्रश्न पूछने का अधिकार दिया गया |

*  1909  ई0 का भारत परिषद् अधिनियम ( मार्ले – मिंटो सुधार ) : –

  • इस अधिनियम द्वारा भारतीयों को विधि निर्माण तथा प्रशासन दोनों में प्रतिनिधित्व प्रदान किया गया |
  • विधानमंडल के आकार एवं शक्ति में वृद्धि की गई |
  • केंद्रीय विधान परिषद् में भारतीय सदस्यों को सार्वजनिक विषयो पर भी प्रश्न पूछने का अधिकार दिया गया |
  • मुस्लिम को पृथक निर्वाचन की ब्यवस्था गई |

*  1919  ई0 का भारत  शासन अधिनियम ( मांटेग्यू -चेम्सफोर्ड सुधार ) : –

  • इस अधिनियम द्वारा पहली बार केंद्र में द्विसदनीय ब्यवस्था स्थापित की गई |   [ (A)  उच्च सदन (Council of State)  – 60  सदस्य   (B) केंद्रीय विधानसभा  (Council Of Assembly ) :- 144  सदस्य
  • इसके द्वारा सभी विषयो को केंद्र तथा प्रान्तो में बाँट दिया गया | [ (A) आरक्षित विषय ( किसी के प्रति उत्तरदायी नहीं  (B) हस्तांतरित ( विधानसभा के प्रति उत्तरदायी )]
  • इस अधिनियम द्वारा प्रांतो में द्वैत शासन प्रणाली लागू किया गया |
  • इस अधिनियम द्वारा पहली बार प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली को अपनाया गया |
  • साम्प्रदायिक चुनाव में सिक्खो, ईसाइयो ,आंग्ल भारतीयों  तथा यूरोपियो को भी आरक्षण दिया गया |

*  1935  ई0 का भारत  शासन अधिनियम ( मांटेग्यू -चेम्सफोर्ड सुधार ) : –

  • इस अधिनियम द्वारा सर्वप्रथम भारत में संघात्मक सरकार की स्थापना की गई |
  • प्रांतो में द्वैत शासन समाप्त कर दिया गया तथा प्रांतो को स्वायत्ता दी गई
  • केंद्र स्तर पर द्वैद शासन प्रणाली लागू की गई |
  • इस अधिनियम द्वारा सूचियों की ब्यवस्था की गई |
  • इस अधिनियम द्वारा सर्वोच्च न्यायलय (1937 ई0) तथा भारतीय रिजर्व बैंक (1935 ई0) की स्थापना की गई |

*  1947  ई0 का भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम :-

  • भारत को स्वतंत्र एवम संप्रभु राष्ट्र घोषित किया गया |
  • भारत को दो खंडो में  (भारत एवम पाकिस्तान ) विभाजित किया गया

 

दोस्तों , उम्मीद करता हु की आपको यह आर्टिकल अच्छी तरह से समझ में आया होगा | अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया हो तो इसे आप अपने दोस्तों के साथ सोशल मीडिया जैसे – फेसबुक , व्हाट्सप्प  इत्यादि के माध्यम से शेयर करे | धन्यवाद !

 

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Sandeep Kumar

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