नागरिकता संशोधन बिल (सीएबी) और एनआरसी में अंतर – Difference between Citizenship Amendment Bill (CAB) and NRC

नागरिकता कानून के विरुद्ध देश के कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इस विरोध प्रदर्शन की शुरुआत पूर्वोत्तर भारत के असम से हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के विरुद्ध देश भर में हो रहे हिंसक प्रदर्शनों को दुर्भाग्यपूर्ण और बेहद निराशाजनक करार दिया।

नागरिकता (संशोधन) विधेयक क्या है ?

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने हाल ही में नागरिकता संशोधन बिल-2019 को मंजूरी दे दी. राष्‍ट्रपति कोविंद के हस्‍ताक्षर के साथ ही नागरिकता संशोधन विधेयक- 2019 कानून बन गया है. इसके साथ ही यह कानून बन गया और पाकिस्तान, अफगानिस्तान तथा बांग्लादेश के अल्पसंख्यक शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने का रास्ता साफ हो गया.

संसद ने 11 दिसंबर 2019 को नागरिकता संशोधन विधेयक (CAB) को मंजूरी दे दी है. नागरिकता (संशोधन) विधेयक 2019 देश भर में मचे बवाल के बीच राज्यसभा में पारित हो गया. सदन ने विधेयक को प्रवर समिति में भेजे जाने के विपक्ष के प्रस्ताव एवं संशोधनों को खारिज कर दिया है. राज्यसभा में विधेयक के पक्ष में 125 वोट जबकि विपक्ष में 99 वोट पड़े.

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में विधेयक को पेश किया. गृह मंत्री अमित शाह ने इस पर लगभग छः घंटे की बहस के बाद सदन में विधेयक से संबंधित जवाब दिए. लोकसभा में यह विधेयक पहले ही पारित हो चुका है. इस विधेयक के विरुद्ध असम सहित पूर्वोत्तर के कई राज्यों में प्रदर्शन हो रहा है.

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद कहा कि नागरिकता (संशोधन) विधेयक मुसलमानों को नुकसान पहुंचाने वाला नहीं है. उन्होंने कहा कि यदि देश का विभाजन न हुआ होता और धर्म के आधार पर न हुआ होता तो आज यह विधेयक लेकर आने की कोई जरूरत नहीं पड़ती.

नागरिकता (संशोधन) विधेयक से संबंधित मुख्य तथ्य

• इस विधेयक को कानून का रूप लेने से पाकिस्तान, अफगानिस्तान तथा बांग्लादेश में धार्मिक उत्पीड़न के वजह से वहां से भागकर आए हिंदू, ईसाई, सिख, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म को मानने वाले लोगों को नागरिकता (संशोधन) विधेयक के तहत भारत की नागरिकता दी जाएगी.

• भारतीय नागरिकता लेने हेतु अभी 11 साल भारत में रहना अनिवार्य है. नए विधेयक में प्रावधान है कि पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यक यदि पांच साल से भी भारत में रहे हों तो उन्हें नागरिकता दी जा सकती है.

• इस संशोधन के तहत ऐसे अवैध प्रवासियों को जिन्होंने 31 दिसंबर 2014 की निर्णायक तारीख तक भारत में प्रवेश कर लिया है, वे भारतीय नागरिकता हेतु सरकार के पास आवेदन कर सकेंगे.

• नए विधेयक के तहत यह भी व्यवस्था की गयी है कि उनके विस्थापन या देश में अवैध निवास को लेकर उन पर पहले से चल रही कोई भी कानूनी कार्रवाई स्थायी नागरिकता हेतु उनकी पात्रता को प्रभावित नहीं करेगी.

नागरिकता (संशोधन) बिल नागरिकता अधिनियम 1955 के प्रावधानों को बदलने हेतु पेश किया गया है. इसमें बांग्लादेश, अफगानिस्तान और पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्मों के शरणार्थियों हेतु नागरिकता के नियमों को आसान बनाना है. इस बिल संशोधन का मुख्य उद्देश्य चुनिंदा श्रेणियों में अवैध प्रवासियों को छूट देना है. इससे नागरिकता प्रदान करने से संबंधित नियमों में बदलाव होगा.

नागरिकता संशोधन विधेयक (CAB) क्या है?

यह विधेयक नागरिकता अधिनियम 1955 में बदलाव करेगा। इस विधेयक के तहत बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफगानिस्तान समेत आस-पास के देशों से भारत में आने वाले हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी धर्म वाले लोगों को नागरिकता दी जाएगी।

नागरिकता संशोधन विधेयक (CAB) संसद में पास होने और राष्ट्रपति की महुर लगने के बाद नागरिक संशोधन कानून (CAA) बन गया है।

CAB बिल में कौन से धर्म शामिल हैं?

नागरिकता संशोधन बिल में छह गैर-मुस्लिम समुदायों- हिंदू, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध और पारसी धर्म से संबंधित अल्पसंख्यक शामिल हैं। इस विधेयक के तहत 31 दिसंबर 2014 तक धर्म के आधार पर प्रताड़ना के चलते पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए धार्मिक अल्पसंख्यक के लोगों को भारतीय नागरिकता दी जाएगी।

पिछला नागरिकता मानदंड क्या थे?

भारतीय नागरिकता लेने के लिए भारत में 11 साल रहना अनिवार्य था। नए विधेयक के तहत पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यक यदि पांच साल से भी भारत में रहे हों तो उन्हें भारतीय नागरिकता दी जा सकती है।

एनआरसी (NRC) क्या है?

एनआरसी (NRC) असम में अधिवासित सभी नागरिकों की एक सूची है। वर्तमान में राज्य के भीतर वास्तविक नागरिकों को बनाए रखने और बांग्लादेश से अवैध रूप से प्रवासियों को बाहर निकालने हेतु अद्यतन किया जा रहा है। यह पहली बार साल 1951 में तैयार किया गया था।

NRC एनआरसी प्रक्रिया हाल ही में असम में पूरी हुई। हालांकि, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने नवंबर 2019 में संसद में घोषणा की कि एनआरसी पूरे भारत में लागू किया जाएगा।

NRC के तहत पात्रता मानदंड क्या है?

राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) की वर्तमान सूची में शामिल होने के लिए व्यक्ति के परिजनों का नाम साल 1951 में बने पहले नागरिकता रजिस्टर में होना चाहिए या फिर 24 मार्च 1971 तक की चुनाव सूची में होना चाहिए।

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दस्तावेजों में:- इसके लिए अन्य दस्तावेजों में जन्म प्रमाणपत्र, शरणार्थी पंजीकरण प्रमाणपत्र, भूमि और किरायेदारी के रिकॉर्ड, नागरिकता प्रमाणपत्र, स्थायी आवास प्रमाणपत्र, पासपोर्ट, एलआईसी पॉलिसी, सरकार द्वारा जारी लाइसेंस या प्रमाणपत्र, बैंक या पोस्ट ऑफिस खाता, सरकारी नौकरी का प्रमाण पत्र, शैक्षिक प्रमाण पत्र एवं अदालती रिकॉर्ड होना चाहिए।

विधेयक को लेकर विवाद क्यों?

विधेयक को लेकर विपक्षी दल सबसे ज्यादा विरोध कर रहे है. विपक्षी दल का कहना यह है कि इसमें मुख्य रूप से मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाया गया है. उनका कहना यह भी है कि यह संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है, जो समानता के अधिकार की बात करता है.

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